आप को मेरी यह बात माननी पड़ेगी कि आज कल जो कुछ हो रहा है उसका ज्ञान व विज्ञान से हट कर भी कुछ अर्थ है, बल्कि हम तो इसे ईश्वर का एक चिन्ह मान रहे हैं, काबा बिना परिक्रमा करने वालों के बिल्कुल खाली है, मुसलमान कहते हैं कि यह ईश्वर की उपासना के लिए बनाया जाने वाला सब से पहला घर है, इस घर को अल्लाह ने चुना और हज़रत आदम के जनम से पहले ही फरिश्तों ने इस घर की नींव रखी, फिर उसे ईश्वरीय दूत, हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माईल के साथ मिल कर बनाया लेकिन आज यह घर दर्शन करने वालों से खाली है। सूना काबा मुसलमानों के दिल को दुखी कर रहा है और यह दुख, घर में बंद पड़े रहने, आर्थिक घाटे और काम काज के ठप्प होने से कई गुना बड़ा और अधिक है।
दुख क्या इस धरती पर इस बरकत वाली जगह से जिस तरह से मुसलमानों को दूर कर दिया गया है वह तो एक तरह का ईश्वरीय प्रकोप की प्रतीत होता है। लेकिन आप यह भी विश्वास करें कि यह हमारी बात केवल श्रद्धा व भावनाओं की बाढ़ में बहने की वजह से नहीं है बल्कि इस का वैज्ञानिक आधार भी है।
हम यह कहते हैं कि मक्का नगर, ब्रहमाण्ड का केन्द्र बिन्दु है। बहुत से शोधों में कहा गया है कि मक्का और काबा, थल का केन्द्र है। इसी तरह यह भी सिद्ध हुआ है कि धरती के केन्द्र की तरफ धरती पर सिर रखने से अर्थात सजदा करने से शरीर से नकारात्मक ऊर्जा का निकास होता है।
इन सब के बावजूद आज यह हालत है कि काबा बंद, धार्मिक स्थल वीरान लेकिन सवाल यह है कि यह कोरोना कहीं ईश्वरीय प्रकोप तो नहीं?
लेकिन अगर ईश्वरीय प्रकोप है तो फिर भले बुरे सब क्यों पिस रहे हैं? इन सब सवालों का जवाब यही है कि धार्मिक दृष्टि से जब इस प्रकार की प्राकृतिक आपदा आती है तो उसमें भले बुरे का फर्क़ नहीं होता और सब निशाना बनते हैं। भले लोगों के लिए आपदा परीक्षा और बुरे लोगों के लिए सज़ा होती है।
कोरोना ईश्वरीय प्रकोप हो या परीक्षा यह तो निश्चित है कि उसने आधुनिकता व भौतिकवाद व भोग विलास में डूबे इन्सानों और मेडिकल सांइस के जादू पर इतराने वाले लोगों को याद दिलाया है कि " इस ब्रहमाण्ड पर शासन किस का है?
" आज सरकार किसकी है?" इस बड़े सवाल का जवाब कुरआने मजीद ने दिया है। कुरआने मजीद की आयत है " जब वह सब सामने निकल कर आएंगे, तो उनकी कोई भी बात अल्लाह से छुपी नहीं होगी, आज किसी की सरकार है? शक्तिशाली व एक अल्लाह की। "
सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो बहुत चल रहे हैं जहां अलग अलग धर्म के लोग, ईश्वर की शरण में जाकर इस महामारी से बचाव की गिड़गिड़ा कर प्रार्थना कर रहे हैं। तो क्या यह संदेश हम तक पहुंचा है? कुरआने मजीद में कहा गया है कि " निश्चित रूप से इन्सान जब खुद को हर ज़रूरत से दूर पाता है तो अपनी हद भूल जाता है" कहीं कोरोना हमें अपनी हद याद दिलाने का एक उपाय तो नहीं?